Wednesday, May 25, 2011

[१७९]
सद् गुरु-चरण उपासिता जाण |
आंगवाले ज्ञान विज्ञानेंसी ||१||
आता कोठें काहीं राहिले ना न्यून |
अवघे परिपूर्ण एकलेंचिं ||२||
एक ना जे दुजें शून्य ना संपूर्ण |
देखयेली खुण महा-शून्यीं ||३||
स्वामी म्हणे आम्ही न पडों संदेही |
देही चि विदेही आत्मरूप ||४||

[१८०]
अनाथांचा नाथ पतित पावन |
सज्जन-जीवन वासुदेव ||१||
दुर्बलांचा वाली सखा दीन-बंधू |
कारुण्याचा सिंधु वासुदेव ||२||
शरणागता हात देई सदोदित |
संतांचे दैवत वासुदेव ||३||
स्वामी म्हणे देव भाविका माउली |
कृपेची साउली करीतसे ||४||

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