[३६]
राम-नाम धरा कंठी |
पाप जाय उठाउठीं ||१||
नामें पाषाण तारिले |
नामें पापी उद्धारिले ||२||
नाम जपे वाल्या कोळी |
धन्य झाला भू-मंडळी ||३||
नामे तारिली पिंगला
अजामीळ मुक्त केला ||४||
राम-नाम बीज-मंत्र |
स्वामी जपे अहोरात्र ||५||
[ ३७ ]
कोणी भेटो सुष्ट दुष्ट |
सदा असावें संतुष्ट ||१||
मान तैसा अपमान |
मनी लेखावा समान ||२||
प्राप्त होतां सुख-दु:ख
नये मानूं हर्ष-शोक ||३||
उठावतां काम-क्रोध |
चित्त न व्हावें प्रक्षुब्ध ||४||
स्वामी म्हणे प्रतिक्षण |
आत्मरूपी अनुसंधान
Subscribe to:
Post Comments (Atom)
No comments:
Post a Comment