[ ११ ]
नाशिवंत देह पुत्र वित्त गेह |
अल्प हि संदेह नाहीं मज ||१|
विश्व सर्व जाण काळाचे भक्ष्यान्न |
प्रत्यक्ष प्रमाण देखतसें ||२||
जारज अंडज स्वदेज उद्वीज |
जन्म हें चि बीज विनाशाचें ||३||
अज अविनाश हरि-पद एक |
झालों मी सेवक स्वामी म्हणे ||४||
[ १२ ]
हरि-रूप जाण मृत्तिका पाषाण |
ग्रह तारांगण हरि-रूप ||१||
अथांग सागर अनंत आकाश |
पावन निःशेष हरि-रूप ||२||
मन बुद्धी अहं अष्टधा प्रकृती |
मूळमाया-व्यक्ती हरि-रूप ||३||
एकला चि हरि नांदे सर्वां घटीं
आदि -मध्य-अंती स्वामी म्हणे ||४||
Subscribe to:
Post Comments (Atom)
No comments:
Post a Comment