Sunday, April 24, 2011

[१३३]
नमो जय जय सद्गुरुराव
देहीं दाखविला देव ||१||
पाजळुनी ज्ञान-ज्योती |
दूर केली भव-भ्रांति ||२||
होवोनियां गुणातीत |
जगीं वर्ते साक्षीभूत ||३||
स्वामी म्हणे नि:संदेह |
झालो देहीं चि विदेह ||४||

[१३४]
मनासी प्रसन्न ठेवीं रात्रं-दिन |
कदा काळी खिन्न होवों नेदी ||१||
ते चि घाली जान जीवासी बंधन |
मोक्षासी कारण ते चि होय ||२||
युक्ती-प्रयुक्तीनें तया गोंजारून |
दाखवावी खून स्वरूपाची ||३||
स्वामी म्हणे मन सारोनिया मागे
व्हावें गा निजांगें शांति-रूप ||४||

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