Monday, December 3, 2012


|  हरी ओम |

माताजी- हे जगन्मातर
भाग्यवान  तव नंदन ।
करी 'अमृतधारा' ह्या
तुझ्या तुज 'समर्पण
              --- स्वामी स्वरूपानंद



जगी जन्मुनी अभिनव -जीवन -सत्कविवर होईन
स्वानुभवान्त :स्फुर्त नवरसी सत्य-काव्य निर्मीन ।१।

जगी जन्मुनी अभिनव-जीवन-गायकवर होईन
अनुभव-सप्तस्वरी सदोदित सत्य-गीत गाईन ।२।

जगी जन्मुनी अभिनव-जीवन-तंतकार होईन ।
अनुभव वीणेतून सुसंगत सत्य-स्वन काढीन ।३।।

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