Sunday, December 9, 2012

क्षणमप्यवतिष्ठते श्वसन् यदि न तु लाभवान स जन्तुः
कवि -कुल-गुरु कालिदास सुचवी जीवनमहती-हेतु ।।१९।।
जरि सत्कार्यी गेली जावो पार्थिव नश्वर काया
दिलीपामुखें तो चि सांगतो यशोदेह रक्षाया ।।२०।।
समता सुटतां श्रद्धापूर्वक सत्वर करुणा भाक
जगन्माउली एकली भली देईल तुला हाक ।।२१।।

No comments:

Post a Comment